जिसको याद कहते हैं…

उसको याद करने में सिर्फ़ एक ख़तरा है, फिर से याद आएगी फिर से दिल दुखाएगी फिर से वो सभी मंज़र,आँख से छलक जाएँ, फिर से बेख़यालाना,हम कहीं भटक जाएँ, ये भी कोई अच्छा है? दिल मगर हाँ! सच्चा है, दिल जो हमसे कहता है, याद तो करो लेकिन रात के अंधेरे में, जब कोई…

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मैं वही सिन्धु नदी…!

मैंने तारीख़ को देखा जो उठाकर, पाया हर किसी को सुकूँ मेरे किनारे आया मैंने तारीख़ को देखा है बिगड़ते-बनते मैं भी तारीख़ का हिस्सा रही हूँ सदियों तक, ख़ौफ़ज़दा रहती हूँ अक्सर यूँ भी, कि मैं तारीख़ ही बनकर न सिमट जाऊँ कहीं, जिनके जीवन का मैं आधार रही हूँ सदियों, उन्हीं लोगों की…

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जब तलक चप्पू चलाएगा अनाड़ी , तब तलक डूबेगी ही किश्ती तुम्हारी !

इस व्यवस्था के ही तो मारे हुए हैं इसलिए तो जीत कर हारे हुए हैं वरना किसमें दम है कि हमको हरा दे? इस करीने से हमारा सिर झुका दे! हम वो हैं जो काम में अपने निपुण हैं झाँक कर देखो! हमीं में सारे गुण हैं हम वो हैं जो छत्र ना पुरखों का…

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राब्ता

  मन हुआ फ़िर तुमसे राब्ता कर लूँ, खोज-ख़बर तुम्हारी लेने के लिए फ़क़त जानने के लिए कैसी हो! खुश हो? या कोई ग़म तुम्हें सताता है? क्या अंधेरा अब भी तुम्हें डराता है? क्या दिल में कहीं मेरी याद बाक़ी है? या ज़ेह्न ही की तरह दिल भी मुझसे खाली है? क्या दिन तुम्हारे…

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