लक्ष्मण को शक्ति लगने के बाद जब महावीर हनुमान संजीवनी बूँटी लेने जाते हैं, तो रास्ते में सूर्य से बात करते हुए जाते हैं ।उनसे विनती करते हैं कि-
हे सूरज इतना याद रहे, संकट एक सूरजवंश पर है।
लंका के नीच राहू द्वारा आघात दिनेश अंश पर है।।
(और विनम्र होके कहते हैं….)
इसलिए छिपे रहना दिनकर जब तक न जड़ी पहुँचा दूँ मैं।
बस तभी प्रकट होना भगवन् जब संकट घड़ी मिटा दूँ मैं।।
मेरे आने से पहले यदि किरणों का चमत्कार होगा,
तो सूर्यवंश में सूर्यदेव निश्चित ही अंधकार होगा।।
आशा है एक विनती ये सच्चे जी से स्वीकारोगे।
आतुर की ऐसी अवस्था को होके करूणार्थ निहारोगे।।
और इसके बाद हनुमान अपने पूरे पौरुष के साथ चेतावनी देते हैं सूर्य को……..
अन्यथा क्षमा करना दिनकर, अंजनी तनय से पाला है।
बचपन से जान रहे हो तुम हनुमत कितना मतवाला है।।
मुख में तुमको धर रखने का फिर वही क्रूर साधन होगा,
बंदी मोचन तब होगा जब लक्ष्मण का दुख मोचन होगा।।
(अनाम)
भारत को भी अब यही करना है, उसे हनुमान की मुद्रा में आना है।। उसे अहसास कराना होगा दुनिया को कि यहाँ बुद्ध भी है और युद्ध भी।। जिसे जो भाषा समझ में आती हो,उसे उसी में जवाब दिया जाए।।


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