हिन्दू मुस्लिम सीख इसाई
 यूँ तो केहते एक है भाई..
लेकीन हर एक छोटी बात पे..
जने क्यों बनते हो कसाई.

उपर वाला एक है ये बात भी जान रहे हो..
सबका मलिक एक है ये बात भी मान रहे हो..
फ़िर क्यों छोटी टुकडों में तुम इनको ही बाट रहे हो.
कुछ अछा समझने पर क्यों मुझको ही डाँट रहे हो..

ये सब बात को जनो तुम
 बात मेरी अब मनो तुमएक..
हर बात पे धूम धड़ाका क्यों.
तुम बन जाते हो लड़ाका क्यों

मार काट तुम करने वालो क्या तुमको अहसास है.
इस पथ पर चलने से हुआ सबका सिर्फ विनाश है.

इतिहास के पन्नो को तुम भी उठा के देख लो..
दिमाग के  जंग लगे नसों को एकबार तुम भी सेंख  लो..

अंग्रेजों के पास तो सारे अश्त्र शस्त्र थे..
हमरे पास गाँधी जी के कूछ खादी के वस्त्र थे..
सत्य अहिंसा के दम से जन जन से हाथ मिलाया था..
बिना खून ख़राबे के अंग्रेजों को दुर भगाया था…

तो गाँधी जी के पद चिन्हो से तुम भी नाता जोड़ लो..
स्नेह प्यार को अपनो अब मार काट को छोड़ दो…

Contributed BySaikat Majhi


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