आखों में ख्वाबो का घर है, अच्छा है,
पहली मोहब्बत का असर है,अच्छा है||

सुनो साहिबो कर लो दिल की हेरा फेरी भी,
इस काम कि यही उमर है,अच्छा है||

बंटवारे के बाद भी आलम मुल्क विरोधी है,
लेकिन पहले से बेहतर है,अच्छा है||
चाहते है वो मुल्क के फिर से टुकड़े टुकड़े हो,
जब तक हम है,तब तक डर है,अच्छा है||

तूफानों में भी कश्ती खूब सलामत है,
उपरवाले की मेहर है,अच्छा है||

-विक्रम महमिया |

Contributed By: Vikram Mahamiya


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3 thoughts on “चाहते है वो मुल्क के फिर से टुकड़े टुकड़े हो !

  1. सुनो साहिबो कर लो दिल की हेरा फेरी भी,
    इस काम कि यही उमर है,अच्छा है||
    बंटवारे के बाद भी आलम मुल्क विरोधी है,
    लेकिन पहले से बेहतर है,अच्छा है||

    सच्चा है अभी बच्चा है ,मेरी समझ से ये अच्छा है||

  2. I do agree ᴡitһ all of the concepts yoս’ve introduceԁ on your post.
    They’re vᥱry cnvincing and can definitely work.
    Ꮪtill, the posts arе too quick for novices. May just you please extend them a bit from subsequent time?
    Thank yoou for thhe post.

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