जब तलक चप्पू चलाएगा अनाड़ी , तब तलक डूबेगी ही किश्ती तुम्हारी !

इस व्यवस्था के ही तो मारे हुए हैं इसलिए तो जीत कर हारे हुए हैं वरना किसमें दम है कि हमको हरा दे? इस करीने से हमारा सिर झुका दे! हम वो हैं जो काम में अपने निपुण हैं झाँक कर देखो! हमीं में सारे गुण हैं हम वो हैं जो छत्र ना पुरखों का…

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