लड़ाई-झगड़ों से हमारे गाओं-घरों को उजड़ा जा रहा है ,
बदला लेंगे इसलिए हथियार उठाया जा रहा है |
सोचा था और भी हमारा साथ देंगे इंसानियत के वास्ते ,
पर हमें तो आतंकवादी करार दिया जा रहा है !

फ़िर हमने ख़ुदा से पूछा क्या गलती थी हमारी ?
क्यों हमारी ज़िंदगी को वीरान बना दिआ लोगों ने ?
तो खुद ने कहा, उन्होंने भी गुस्से में वही किया ,
जैसे अब तू बाकि बेकसूरों की ज़िंदगी को वीरान बना रहा है |

क्या मिलता है इन लड़ाई झगड़ों से कोई मुझे बताए ?
एक बार कोई पूछे अपने दिल से ,
किसको मिल रहा सुकूं है ? किसको आराम आ रहा है ?
धर्म से जुड़ी बुराइयों को ना खोजो मेरे यारों ,
क्योंकि कोई धर्म बुरा नहीं है ,
इसे तो हमारे जैसे शैतानों द्वारा बुरा बनाया जा रहा है |

हम सब चाहें तो बदल सकते है दुनिया ,
लड़ाई झगड़े रुक सकते हैं पर ,
गुस्से को सिर्फ और सिर्फ बढ़ाया जा रहा है |
मैं चाहता हूँ कि सब एक रहें ,
बस इसलिए मोहब्बत का ये पैगाम भेजा जा रहा है ||

-शाहनवाज़ उस्मानी

Contributed By: Shahnawaz Usmani


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