“महिला सशक्तिकरण”

महिलाओ को निजी फैसले लेने की सव्तंत्रा और हर छेत्र में बराबरी का अधिकार देना ही महिला सशक्तिकरण है। देश के विकास का लक्ष्य प्राप्त करने की ओर महिला सशक्तिकरण बहुत ज़रूरी हत्यार है। देश के उज्वल भविष्य के लिए महिलाओ को समर्थ बनाना अनिवार्य है ,क्योंकि महिला अपने बच्चे के भवीष्य के साथ देश का भी भविष्य सुनिश्चित करती है। भारत की प्रगति में बराबरी का हिस्सेदार बनाने के लिए भारतीय सरकार ने महिलाओ के लिए अनेक आंदोलन और कानून बनाये है।

परन्तु विचार कीजियेगा : क्या आंदोलन या कानून महिलाओ में “महिला सशक्तिकरण” का भाव ला सकता है ?या फिर “महिला सशक्तिकरण” यह के जब एक महिला को स्वयं का मूल्य ज्ञात हो और वह स्वयं के लिए आवाज़ उठा सके,वह समाज की नीतियों से लड़ सके और स्वयं के लिए सही और गलत निश्चित कर सके
?
“अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2016 “ को मैं महिलाओ के हृदय में यह बीज बोना चाहती के संतान की संख्या निर्धारित करने का अधिकार महिलाओ का होना चाहिए ना के पुरुष का। और संतान की संख्या के विषय में पुरुष समाज की आखें खोलने के लिए : पुरुष समाज से एक सवाल ?

हर पुरुष से एक सवाल ?
क्या आप जानते है महिलाओ का जीवन संग्राम ?
आपकी एक रात के पश्चात: है नौ माह का कारागार।

माँ बनना है वरदान;
परन्तु क्या यह है उसके जीवन का आधार ?

दुखद समाचार :
हमारा समाज ,संतान की संख्या निर्धारित  करने का भी नहीं देता महिलाओ को अधिकार।
इस महत्वपूर्ण कार्य का विधाता है निर्बल नारी के पति का विचार।

क्या कल्पना नही ,संतान का जन्म है पीड़ित काल;
महिलाओ को होता है मृत्यु का आभास ,
क्या आपका हृदय है ,इस अनुभव अज्ञात ?

दोषी महिला है या उसका भाग्य ?
संतान की लिंग का भी दोष देता है उसे समाज ;
यदि निसंतान हो, तो कह देता है बांज।

अपनी माता से अवश्य पूछना यह सवाल;
आपके जीवन के पूर्व और पश्चात,क्या है माता की इक्छाओ का बलिदान ?

यह दृष्टिहीन समाज,
करता है शाहजहाँ के प्रेम का गुन-गान:
जिसने किये मुमताज़ से 14 संतानो का सुख प्राप्त ,
37 की आयु में हो गया मुमताज़ का देहांत।
क्या है आपको अनुमान ?
सम्पूर्ण आयु मुमताज़ ने किया जन्म देने का काम।

इस बात का साक्षी है संसार;
मुमताज़ से अधिक है ताजमहल का सम्मान।

विनती है तुझसे ऐ पुरुष समाज :
बंद कर यह अत्याचार ,
दे-दे महिलाओ को चंद अधिकार !
यदि नहीं समझता तू उसे समान,
कम से कम करले सुखद परिवार का विचार।

-Manal AQUIL


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