राब्ता

  मन हुआ फ़िर तुमसे राब्ता कर लूँ, खोज-ख़बर तुम्हारी लेने के लिए फ़क़त जानने के लिए कैसी हो! खुश हो? या कोई ग़म तुम्हें सताता है? क्या अंधेरा अब भी तुम्हें डराता है? क्या दिल में कहीं मेरी याद बाक़ी है? या ज़ेह्न ही की तरह दिल भी मुझसे खाली है? क्या दिन तुम्हारे…

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