आरक्षण ! ?

1950 में ब. र. अम्बेदकर द्वारा लिखित हमारा संविधान,
ग्रंथों के समान, है यह भारत वासियों का अभिमान ।

आरक्षण है, इसकी देह का छोटा सा भाग,
क्या यह है, वरदान या अभिशाप ?

इतिहास में है बखान,
जाति के आधार पर मिलता था सम्मान ।
हर दिशा में था इसका ही गान,
छूत – अछूत, जाति – जातिवाद, समान – असमान
का था भारत वर्ष गुलाम ।
परिणाम स्वरूप मिला वंचित समुदाय को
आरक्षण का अधिकार
सामाजिक स्वतंत्रता था जिसका आधार ।
आरक्षण की जड़ों में था भारत
के विकास का विचार;
विडंबना यह है; आज यह है राजनितिक हतियार ।

वर्तमान पूछता है एक सवाल,
क्या गरीबी की मित्रता है निचली जातियों के साथ?
अर्थात आरक्षण नही है अभिशाप ,
कदाचित गरीबों को म इले इसका लाभ ॥

-Manal AQUIL


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